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rameshagarwal


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जप की माला में १०८ दाने की महत्ता एवं रहस्य

Posted On: 3 Dec, 2016  
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मौत की यात्रा -मानवता की मिशाल

Posted On: 22 Nov, 2016  
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जे एन यू फिर विवादों में-

Posted On: 5 Nov, 2016  
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आतंकवाद पर तुच्छ राजनीती क्यों?

Posted On: 2 Nov, 2016  
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पति के प्रति प्रेम समर्पण का पर्व करवा चौथ

Posted On: 18 Oct, 2016  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ऐ वतन के रखवालो ,,कुर्सी पर बैठकर फैसला करने वालो मांग रही है एक औरत तुमसे हिसाब बहन की राखी मांग रही अब वह हाथ जिस पर बंधी राखी उसने २२ साल मांग रही है एक माँ तुमसे जीवन जीने का आधार कहा गया उसका लाल जिसे छुपाकर सुलाती थी वह अपने पास मांग रही है आज एक बहन अपनी मांग का सिन्दूर जो भेज दिया दुश्मनो ने दुनिया से अब कोशो दूर पूछ रही है एक नन्ही गुड़िया तुमसे यह एक सवाल क्या पापा नही आएंगे अब इस साल आखिर कब तक चलते रहेंगे ये सवाल कह रही है आज एक माँ तुमसे ..... कब तक और कितना खून बहायेंगे कब तक अपने सपूतो की जान गवाएंगे कर दो अब आर - पार का युद्ध ऐलान बता दो पाकिस्तान को अब शांत नही रहेगा हिंदुस्तान

के द्वारा:

जय श्री राम अग्रवाल साहब, विस्तृत जानकारी के साथ आपका यह आलेख महत्वपूर्ण है ..संयोग से आपने पितृपक्ष की पूर्व संध्या पर ही यह जानकारी देकर बहुतों पर उपकार किया है. हमारे रीत रिवाज में बहुत से ऐसे कर्मकांड हैं जिनके बारे में हम पूरी जानकारी न रखते हुए भी मानते हैं. जो पेशेवर ब्रह्मण हैं उन्हें चाहिए कि इन रीति रिवाजों के बारे में लोगों को जागरूक करें ताकि उनके प्रति भी लोगों में श्रद्धा जागरूक हो. ज्यादातर धर्म स्थानों में पंडितों की छीना झपटी, लोलुपता से लोगों में आस्था के प्रति ठेस महसूस होती है. सबको मिलकर यह प्रयास करना चाहिए ताकि श्रद्धा उत्पन्न हो और लोग श्रद्धापूर्वक दान दक्षिणा दें न कि बलपूर्वक! सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम अग्रवाल साहब, आपने तो केजरीवाल का पूरा कच्चा चिटठा खोल दिया, पंजाब और गोवा वाले पढ़ेंगे तो कैसे इस घटिया पार्टी को वोट देंगे. दिल्ली की जनता, पढी लिखी जनता कैसे इनके झांसे में आ गयी? मोदी जी इतना अच्छा बोलते हैं, देश विदेश में उनकी बातें सूनी जाती है और उनकी बातों का काफी लोग अनुसरण करते भी हैं, पता नहीं दिल्ली और बिहार की जनता उनकी बात क्यों नहीं समझ सकी ... इधर कोर्ट भी गलत निर्णय दे रहा है, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश पर भी केंद्र सरकार की किरकिरी हुई. ये सब गलतियां कोर्ट से भी हो जाती है. ..क्या किया जाय अग्रवाल साहब, हर कोई मुकद्दर का सिकंदर नहीं होता... हर किसी को नहीं मिलता , प्यार जिंदगी में...आपको उत्तम आलेख के लिए साधुवाद... सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय अग्रवाल साहब, जय श्री राम! आपके पूरे आलेख के साथ सहमति व्यक्त करते हुए मैं भी यही कहना चाहता हूँ, आतंकवाद अब वैश्विक समस्या बन चूका है, इस पर सारे विश्व और रसयुक्त राष्ट्र संघ को भी एक होकर इसका खतम करने के लिए हर सम्भव प्रयास करना चाहिए. निर्दोष लोगों की हत्या कभी भी जायज नहीं कहा जा सकता. इतिहास बतलाता है किधर्म के नाम पर पूरे विश्व में खून खराबा होता आया है. मुस्लिम धर्मावलम्बी ज्यादा कट्टर हैं और वे नौजवानों को शायद पैसे का लालच देकर ब्रेनवाश कर देते हैं जिससे आतंवादी पैदा होते रहते हैं. इस समस्या का समाधान होना ही चाहिए. अभी वर्तमान में भाजपा की बहुमत वाली सरकार है और उसे इस पर निर्णय लेने का पूरा अधिकार है. वह निर्णय ले भी रही है.थोड़ी और सख्ती की जरूरत है. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

रमेश जी जय श्रीराम, सबसे पहले मैं आपका धन्यवाद करता हूँ मेरे ब्लॉग जागते रहो को पढ़कर सकारात्मक टिप्पणी देने के लिए ! आपने सही, लिखा है की ये जानते हुए भी की कांग्रेसी नेता आजाद हिन्दुस्तान के नागरिकों को लूटना शुरू कर देंगे इसलिए कांग्रेस पार्टी को ही भंग कर देनी चाहिए, नेहरु ने महात्मा गांधी की सलाह मानने से इंकार कर दिया, फिर भी नेहरु को ही स्वतंत्र भारत का प्रथम प्रधान मंत्री का ताज पहना दिया, जबकि ७५% जनता लौह पुरुष सरदार बल्ल्भ भाई पटेल को गद्दी पर बिठाना चाहते थे ! अगर आजादी के लिए खाए गए जख्मों की बात करें तो सबसे प्रथम स्थान पर नेताजी सुभाष चन्द्र थे ! अगर आज के भारत की तस्वीर बनाने वाले वाले स्वतन्त्र सैनानियों की सेवाओं का अवलोकन किया जाय तो वे सरदार बल्ल्भ भाई पटेल थे ! फिर नेहरु जी की तो कहीं भी कोइ भूमिका थी ही नहीं फिर भी गांधी जी ने बहुमत का निरादर करते हुए उन्हें ही प्रधान मंत्री बनाया ! रमेश जी कृपया ज़रा ये भी स्पष्ट कर दें की "नेहरु जी के बाबा तोे थे तत्कालीन दिल्ली के कोतवाल गाजीउद्दीन गाजी, फिर उन्हें मोतीलाल नेहरु के पुत्र होने का गौरव कैसे प्राप्त हुआ ?" विस्तृत और वेवाक लेख के लिए साधुवाद !

के द्वारा: harirawat harirawat

रमेशजी जय श्री राम !सबसे पहले मैं आपको सलूट करता हूँ योगा के ऊपर इस विस्तृत, स्वास्थ्य वर्धक और ज्ञान बर्धक लेख के लिए ! आज सारा विश्व जाति, धर्म, ऊंच, चीच, अरीब - अमीर के बंधनों से ऊपर उठकर योगाभ्यास कर रहा है ! मुझे तो ताजुब हुआ जब मैंने बाबा रामदेव को मुस्लिम देशों में जाकर वहां की जनता को योगा भ्यास कराते देखा ! लाखों करोड़ों लोगों ने वहां योगभ्यास किया ! लेकिन हमारे देश भारत में केवल विपक्ष और कुछ कट्टर पंथी मुसलमान इस सत्य को मानने से इंकार कर रहे हैं की योगा बहुत सारी बीमारियों का निदान है ! वे जानते हैं लेकिन क्यों की इस योगाभ्यास को हमारे माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्व स्तर पर लाकर इसे सयुंक्त राष्ट्र में मान्यता दिला दी है ! कहीं मोदीजी की हाँ में हाँ मिलाते हुए नितीशकुमार, कांग्रेस, केजरीवाल, लालू प्रसाद के वोट बैंक कम न हो जाएँ, वे योगाभ्यास का वहिष्कार कर रहे हैं ! अग्रवाल जी लेख के लिए बहुत सारी बधाइयां ! आप मेरे ब्लॉग में आते हो अपने सकारात्मक टिप्पणी के पुष्प गिरा जाते हो इसके लिए धन्यवाद करता हूँ ! हरेंद्र

के द्वारा: harirawat harirawat

आदरणीय अग्रवाल साहब, जय श्री राम!बहुत आश्चर्य होता है इन घटनाओं को देख सुनकर ! हमारे देश में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है /होता रहा है / ...जिस पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं होती. जब पानी सर से ऊपर चला जाता है/कोर्ट का डंडा पड़ता है तब कार्रवाई होती है, वह भी आधे अधूरे तैयारी के साथ. इस घटना में हमारे दो पुलिस अधिकारी की मौत हुई जो दुखद है. हम सब उनके लिए श्रद्धांजलि व्यक्त करते हैं. अच्छा हुआ रामवृक्ष भी मर गया. नहीं मर होता तो उसे भी जेल में डालकर कई साल तक मुकदमे चलते रहते. कुछ बच्चों के भी बयां आये हैं जिससे पता चलता है की रामवृक्ष का कैसा खौफ था वहां? कुछ अशिक्षा की भी कमी है या जागरूकता की की काफी सारे लोग दिग्भ्रमित होकर ऐसे दुष्ट लोगों के अनुयायी बन इसके कब्जे में आ जाते हैं. अभी भी बहुत जरूरत है जन जागरण की. आपके सार्थक आलेख के लिए बधाई!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय अग्रवाल साहब, आपने तो घर बैठे ही सिंहस्थ के दर्शन लाभ करा दिए. प्रयाग या हरिद्वार में जब कुम्भ मेल लगता है चैनलों पर प्रमुखता से दिखलाया जाता है वहीं सिंहस्थ को बहुत ज्यादा मह्त्व् नहीं दिया जा रहा, ऐसा मुझे लगता है. जिन चैनलों को मैं देखता हूँ उन सबमे आजकल की राजनीत, अपराध, आदि की ही ख़बरें रहती हैं. अख़बारों में भी कम चर्चे हैं. फिर भी हमारी हिन्दू धर्म की मानसिकता को बल तो मिलता ही है इन आयोजनों से. सुना था एक साधु के वेश में चोर पकड़ा गया. आजकल चोर उचक्के भी इन मौकों को भुनाने में लग जाते हैं और हमारी परंपरा को बदनाम कर देते हैं. इन सब पर अंकुश लगन चाहिए. सादर! सिंहस्थ मेले पर प्रतिक्रिया नहीं जा रही इसलिए इसे यहीं पोस्ट कर रहा हूँ.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री रमेश जी अति सुंदर लेख आपने घर बैठे बैठे सबको सिंहस्थ कुम्भ मेले में पहुचा दिया मेरा बचपन इलाहाबाद में बीता कुम्भ के समय मेरा शायद जन्म नहीं हुआ था मुझे अध्कुम्भी की धुंधली याद है हमारा घर जी टी रोड पर था घर के सामने से साधुओं की सवारिया निकलती थीं मेरी दादी उस जमाने में घड़े में पानी और साधुओं के लिए खाने के लिए गुड और बेसन के लड्डू बना कर बैठी रहती थी हमारे घर के चौतरे पर पीपल का घना पेड़ था कुछ साधू धरती पर दंड परिक्रमा करते हुए गंगा स्नान के लिए आते थे बीएस धुंधली यादे है इलाहाबाद से मेरे पिता का ट्रांसफर हो गया फिर कभी जाना ही नहीं हुआ हाँ हरिद्वार में एक बार कुम्भ का स्नान किया था

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री रमेश जी भारतीय संस्कृति पर प्रकाश डालता ज्ञान वर्धक लेख " इस साल को “सौम्य” के नाम से है जिसका मतलब की ये वर्ष सौम्यता शालीनता लाएगा.इसका रजा गुरु और मंत्री बुध है इस समय प्रकति उर्जामाया होती पेड़ पौधों को उर्जा मिलती इसलिए ये नववर्ष शक्ति अर्जित करके सक्रिय होने का सन्देश देता है नवरात्र महा पार्वती ,महा लक्ष्मी और महासरस्वती ३ शकितो के रूप में मनाया जाता है जो इच्छा,ज्ञान और क्रिया लो दर्शाता है.!नवरात्रों माने ९ राते है जिससे इन दिनों रात में पूजा भजन जागरण किया जाता है.नव दिनों देवी माँ की स्तुति ,कलश स्थापना सुमधुर घंटियो की आवाज़,धुप बत्तियो की सुगन्धि,, ९ दिनों तक चलने वाला आस्था और विस्वास का त्यौहार है दोनों नवरात्र का सम्बन्ध भगवन राम जी से है रमेश जी पहली बार जाना अतिशय धन्य वाद लेख सम्भाल कर रख लिया बच्चों को समझाने के लिए

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम परीख्जी नमस्कार.आजादी के बाद से हमारी संस्कृति धर्म और इतिहास के साथ बहुत अन्याय हुआ इसको बहुत ख़राब निगाह से देखा गया जब हिन्दू धर्म पर हमला होता व्यक्ति की आजादी के नाम पर उचित कहा जाता लेकिन मुसलमानों के साथ ऐसा नहीं क्योंकि वे एकजुट हो कन्हैया पे लोगो ने इतना समर्थन दिया लेकिन उत्तर प्रदेश में कमलेश तिवारी को बंद कर दिया सब चुप मालदा पूणिमा की हिंसक घटनाओं पर मीडिया चुप क्या पिछली सरकार का सर्वोच्च न्यायालय में भगवन राम और रामसेतु पर दिया हलफनामा हिन्दुओ का अपमान नहीं और क्या या सही था?हिन्दुओ के धर्म ग्रंथो को जलने का विरोध नहीं होना चाइये.बहुत से उद्धरण है लेकिन आपके विचारो के लिए ह्रदय से धन्यवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम पारीख जी आपकी स्वच्छ प्रतिक्रिया और विचारो के ह्रदय से आभारी है हम उम्र में बड़े हो सकते लेकिन अनुभव में नहीं हम वैसे भी २० साल से बीएड पर है इसलिए जो टीवी पर देखते और अखबार में पढ़ते उसी आधार पर कुछ अपनी बुद्धि के हिसाब से लिख देते वैसे गणित विज्ञान के होते साहित्य के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं राजीव दीक्षित का बहुत साहित्य पढ़ा उससे बहुत कुछ ज्ञान मिला देश में इतनी समस्या है लेकिन टीवी चनेल्स कन्हैया पर ही डिबेट करते रहे लाइफ स्पीच दिखाते रहे जबकि जरूरी विषय भूल गए पारीख जी ऐसी गतिविधियाँ jnu में वर्षो से चल रही लेकिन चुकी किसी ने रोका नहीं चलती रही हमारे ख्याल से मोदीजी की सरकार ने अच्छा किया जिस अदालत ने जमानत दी उसपर भी कुछ मीडिया सवाल करने लगा अब कन्हैया नितीश,केजरीवाल और राहुल गांधी से मिलेगा क्या इन नेताओ का कन्हैया को समर्थन देना सही है हमारे आपसे कुछ मदभेद हो सकता लेकिन हमें आपकी सलाह और विचार बहुत अच्छे लगते जिसके लिए ह्रदय से आभार.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

रमेशजी, यह ब्लॉग पढ़ कर लगा कि देश प्रेम की भावुकता में आप कन्हैया कुमार पर कुछ ज्यादा ही पिल पड़े. हमें हर चीज़ को ठन्डे दिमाग से सोचना परखना है नाकि बहाव के साथ बाह जाना. आप एक चिंतनशील व्यक्ति हैं सो कन्हैया अपने आप में कोई चीज़ नहीं है .उम्र, रुतबा (अध्यक्ष) और वामपंथी (JNU के ) माहौल में किसी की भी समझ ऐसी होनी स्वाभाविक है. कन्हैया को दोष देना व्यर्थ है. परन्तु 'नासमझ' तो वो कतई नहीं है. बेशक चालाक जरूर है. उसे हीरो मीडिया ने नहीं बल्कि सरकार ने अपनी गलत हैंडलिंग से बना दिया इस बात से सहमत हूँ की कम्युनिस्टों और कांग्रेस्सियों इस देश का भरपूर बेडा गर्क किया है जिसे कोई मोदी एक साल के अल्प समय में ठीक नहीं कर सकता.

के द्वारा:

रमेशजी, यह 'सफल' आयोजन तो बिलकुल ठीक था पर एक बात कहना चाहूंगा . जहां यमुना तट के मैदानी भू-भाग में इसे आयोजित किया गया था वो स्थान मेरे घर से कोई 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह जगह नदी की इकोलॉजी के हिसाब से बेहद सिन्सिटिव है. इस से नदी को निश्चित तौर पर नुकसान पहुंचा है. मैं दिखा सकता हूँ. सो इस स्थान विशेष का चुनाव एकदम गलत था जो श्री-श्री को नहीं करना चाहिए था. मुझे ज्यादा दुःख योन कर के भी हुआ के कोई 4 - 5 साल पहले श्री रविशंकरजी ने इसी स्थान के इर्दगिर्द मेरीदिल्ली - मेरी यमुना अभियान के अंतर्गत वालंटियर्स (हज़ारों की संख्या में ) द्वारा नंगे हाथों से यमुना का कचरा हटवाया. इन वालंटियर्स में से मैं स्वयं भी एक वालंटियर था. कैसी विडम्बना है की आज वे ही श्री श्री रविशंकरजी इस विश्व सांस्कृतिक आयोजन के ज़रिये उसी यमुना स्थली को दूषित कर के चले गए . आ कर देखिये तो पता चलेगा की जो टनों कचरा वहाँ जनसमुदाय छोड़ गया वह आज तक नहीं हटाया गया. इस जम्बूरी ने जमुना का भला नहीं किया बल्कि नुक्सान ही किया. सोचिये मेरे जैसे पर्यावरण प्रेमियों को कितना दुःख पहुंचा होगा इस 'सफल' अभियान से.

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के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय अग्रवाल साहब, जय श्रीराम ! सचमुच आपका यह ब्लॉग मुझे काफी बेहतरीन लगा. आपने कन्हैया को 'प्यारे भाई' कहकर समझाने की कोशिश की है. कन्हैया के विरोधी शायद ही इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं. आपने उसे अपनी समझ से नेक सलाह ही दी है. मैं फिर यही कहता हूँ कि कन्हैया आज हीरो बन गया है तो उसमे मीडिया के साथ उसके विरोधियों का भी हाथ है. अभी कल ही उसका इंटरव्यू BBC के संवाददाता के साथ देख रहा था. कौन जानता था, कन्हैया को ? इधर के कुछ उसके क्रिया कलाप से मीडिया के साथ साथ सोशल मीडिया पर वह इतना चर्चित हो गया कि वह खुद ही कहने लगा - 'बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा?' अब तो भविष्य ही बताएगा कि वह नेता बनता है या मास्टर/प्रोफ़ेसर.अगर मोदी विरोधियों ने उसे अपनाया तो संभवत: राजनीति में अपनी जगह बना ले अन्यथा इतना आसान तो नहीं है, नेता बनना. राहुल सारे प्रयास के बाद अभी तक सही नेता नहीं बन पाये हैं. केजरीवाल ने मिहनत की है, कुछ जमीनी स्तर पर काम भी किया है, कुछ कालिखें भी पुतवाई हैं और तमाचे भी खाए है. अब तमाचा खाने और कालिख पुतवाने के आसार नजर आ रहे हैं, कन्हैया पर भी. अगर उसके विरोधी ऐसा करते रहे तो वह सुर्ख़ियों में रहेगा और नेता तो बन ही जायेगा, क्योंकि भाषण देने की कला में भी वह माहिर है. भीड़ को बाँध कर रख सकता है. और ज्यादा मैं क्या लिखूं.मैंने तो एक बार ही लिख दिया है. अब बार बार नहीं लिखूंगा. सेना पर उसका हमला गलत था. इससे उसकी साख को बट्टा लगा है और कुछ महिलाओं/ लड़कियों के साथ की गयी हरकत भी उसे बदनामी की तरफ ही अग्रसर करती है. चरित्रवान हुए बिना आदर्श नेता नहीं बन सकता है कोई ...वैसे आजकल हर प्रकार के नेता तो चुन ही लिए जाते हैं और अपनी बदनामी करने से नहीं चूकते. सादर !

के द्वारा: jlsingh jlsingh

रमेश अग्रवाल जी, नमस्कार ! पार्लियामेंट में स्मृति ईरानी के उत्तेतित भाषणों से चारों खाने चिट विपक्ष के जानी मानी हस्तियां ! क्या विपक्ष का काम अब केवल देश के विघटनकारी तत्वों की पीठ थपथपाना, विश्व विद्यालयों में जाकर साम्यवादी विचारधारा के विद्यार्थियों द्वारा, आतंकियों को फूल चढ़ाना, पाकिस्तान के नारे लगाना जैसे कुकृत्यों पर अपनी पार्टी की मोहर लगाना रहगया है ? देश से गद्दारी करने वाली तमाम पार्टियों को जनता द्वारा इतनी जोर का झटका लगना चाहिए की ये अपाहिज ही हो जांय ! आधे अपाहिज हैं अगले झटके में कमर टूट जाएगी बाकी क्या रह जाएगा ? अच्छे लेख के लिए साधुवाद ! हरेन्द्र जागते रहो

के द्वारा: harirawat harirawat

श्री रमेश जी आज आपने अपने बारे में खुल कर लिखा बहुत कष्ट हुआ "हम खुद भुक्तभोगी है हमारे केस में रीड की हड्डी का कानपूर के प्रसिद्ध हस्पताल में ऑपरेशन किया और दस दिन बाद छुट्टी कर दी घर जाते जब तबीयत ख़राब हुयी तो MRI करने को कहा जिससे पता चला की गलत ऑपरेशन हो गया १० दिन बाद कानपूर के प्रसिद्ध सर्जन से दुबारा ऑपरेशन किया जो दिन की जगह रात को किया और वो भी गलत कर दिया ३ हफ्ते बाद तीसरा कराया जो टीक हो गया परन्तु पहले दो गलत की वजह से उठने से मजबूर और २० साल से बेड पर है.इन २० सालो में परिवार को कितनी मानसिक,शारीरिक और आर्थिक कष्ट हुआ भगवान् ही जानते" पढने पर कितना कष्ट हुआ फिर भी आप बहुत हिम्मती है हर विषय पर लिखते हैं |

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम परीक्जी लेख पढने ,प्रतिक्रिया देने और अपने विचार निर्भीक तरह से रखने के लिए धन्यवाद.आप ये तो मानेगे की लार्ड मैकाले ने जब गुल्कुल शिक्षा ख़तम करके अपनी शिक्षा लगी तो उसने कहा था की इससे ऐसे हिन्दुस्तानी पैदा होंगे जो दिल से अँगरेज़ होंगे अपनी संस्कृति धर्म और अतीत से नफरत करेंगे और हमारे जाने के बाद भी सैकड़ो सालो तक हमारे गुण गायेंगे आज आज़ादी के बाद हमारे इतिहास संस्कृत धर्म और महापुरषो को गलत तरीके से पद्य जा रहा भगवाकरण को नफरत की चीज बना दिया देकिहे साहित्य के बारे में हमें बहुत ज्यादा नहीं मालूम लेकिन जो साहित्यकार मारे गए उनमे दो कांग्रेस के राज्य में मोदीजी के आने के पहले मारे गए उसके लिए मोदीजी को क्यों ज़िम्मेदार और ये तो प्रदेश का मामला कश्मीरी पंडितो का निषक्राशन पर राष्ट्र के सेक्युलर ब्रिगेड और बुद्धिजीविओ की चुप्पी सही थी,आपके ज्ञान से हमतो अपने को लाभंतित महसूस करते विचारो के मत विभिन्नता अपनी जगह है.साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

रमेशजी , आपका आलेख अत्यंत सुन्दर और देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत है. मेरा साधुवाद स्वीकार करें. बस एक बात से असहमत हूँ . लेख के अंत में पुरस्कार लौटने वाले सभी लेखकों को आपने चमचा करार दिया जो की सही नहीं है. हाँ, इनमें कुछ लोग कांग्रेस द्वारा obliged रहे होंगें पर सारे के सारे नहीं. दो को तो मैं भी व्यक्तिगत रूप से बतौर मित्र जनता हूँ और दावे के साथ कह सकता हूँ किवे चमचा श्रेणी में नहीं आते. मसलन अशोक वाजपेयीजी को ही लीजिये जिनके पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारीजी भी प्रशंसक रहे है. दरअसल लेखक या कवि नाम के प्राणी अतिशय संवेदनशील होते हैं तो शायद इसीलिए उनकी ऐसी प्रतिक्रिया रही. कृपा कर के ये ना भूलें कि लेखक बिरादरी के तीन लोगों की निर्मम हत्या उनके लेखन को ले कर की गयी जिस से लेखक सम्प्रदाय भड़क गया.. ये तीनो लेखक मामूली साहित्यकार नहीं थे बल्कि देश-विदेश में ख्यातिप्राप्त लेखक रहे हैं. अगर आप समझते हैं की अवार्ड लौटना गलत था तो मैं आपके इस स्वतंत्र विचार की पूरी इज्जत करते हुए इस से इत्तफ़ाक़ नहीं रखता. आप भी अपनी जगह सही हो सकते हो.

के द्वारा:

रमेश अग्रवाल जी आप एक अच्छे लेखक तो हो पर इस कविता को पढने के बाद पता लगा की आप कवि के नाम पर छिपे रुस्तम भी हो ! बहुत अच्छी कविता के माध्यम से आपने मीडिया की पोल खोल दी ! जब काश्मीर में कश्मीरी पंडित मारे जा रहे थे, जब १९८४ में निर्दोष सिखों के खून की होली खेली जा रही थी दिल्ली के सडकों पर , जब बहुत से हिन्दुओं का क़त्ल हो रहा था उस समय इन मीडिया वालों की लेखनी कुंद पड़ गयी थी, क्या इनकी आँखें कानी हो चुकी थी, ये बहरे हो चुके थे ! इनको पिछले दरवाजे से आँखें दिखाई जा रही थी, साथ ही जेबें भी गरम हो रही थी ! अब एक ईमानदार प्रधान मंत्री गद्दी पर बैठा है जो न खुद खाता है न दूसरे को खाने देता है, खाने वालों के पेट में चूहे कूद रहे हैं बे बौखला गए हैं ! मीडिया के जेबों में ताले पड़ गए हैं साथ ही सरकार न उन्हें आँखें दिखा रही है न उनके अंट शंट खबरों को अहमियत दे रही है !अच्छी कविता के लिए साधुवाद !

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम दुबे जी लेख पड़ने और विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् देश में मोदीजी के प्रधान मंत्री बन्ने से सोनिया ब्रिगेड निम्न स्तरतक आ गयी उसे देश की भी परवाह नहीं बीजेपी को चाइये बिहार में स्थानीय नेता तैयार करे और इन पार्टी के विरोध में बोलनेवालो पर कार्यवाही करे अडवाणीजी बहुत निराशा हुई अब आसाम और केरला में स्थानीय लोगो को तैयार कर अभी से तैयारे शुरू कर दे.बिहार में कुछ गलती हुई लेकिन बिहार की जनता को भ्रष्टाचार की कोइ परवाह नहीं लालू ने डरा धमका के लोगो लो बेफकूफ बना दिया परन्तु दोनों लडको और बेटी का बहुत भला किया तीनो को पद मिल जायेंगे.देश का यही हाल विकास रोके है.मोदीजी ६५ साल की बुरइयो को ख़तम करने में लगे है भारतीयों लो काम करने की आदत डालनी पड़ेगी उम्मीद है जल्दी हालर सुधरेंगे.साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम सिंह जी प्रतोक्रिया के लिए धन्यवाद् हमारे आपके विचारे एक मत नहीं हो सकते क्योंकि विरोधी खेमो से आते है.आपने अमित शाह के लिए लिखा क्या लालू की भाषा से आप सहमत दादरी की घटना को इतने दिन दिखने के लिए मीडिया कोकहा गया थाजिस्से मुस्किम एक जुट हो जाए,मुस्लिम नेता ऐसा ज़हर उगलते उसपर आप कुछ नहीं कहते जो बीफ के लिए हल्ला मचा रहे पोर्क पर क्यों चुप रहे देश में मुसलमान दामादो की तरह रह रहे यान तो हिन्दू ही सताए जा रहे इसलियी कर्नाटक में उनकी हत्याओ और केरला,अस्साम,बंगाल में उन्परात्याचार होयते मीडिया चुप रहता इस देश में मीडिया ट्रायल बहुत खतरनाक है जो लोग आज अवार्ड लौटा रहे वे किस घटना पर कौन सी पेइस्थिथ इतनी ख़राब हो गयी जब कश्मीर से हिन्दू निकले गए तबी क्यों चुप थे?लालू मुसलमानों और दलितों को दादरी और आरक्षण में डरा कर एकजुट करने में सफल रहा.अब बिहार का क्या हाल होगा आगे पता चलेगा.प्रतिक्रिया के लिए साधुबाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal




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