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कानून के रक्षको द्वारा कानून के साथ खिड़वाड़

Posted On: 17 Jul, 2015 Others में

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जय श्री राम
देश में वकील काननों की रक्षा करने वाले माने जाते परन्तु यही ये लोग कानून के साथ खेलते हुए उसकी धज्जिया उड़ाना शुरू को करे तो देश का क्या हॉल होगा सब परिचित है.कुछ वर्षो से वकीलों द्वारा समय समय पर विभिन्न मुद्दों को उठा कर जिस तरह हड़ताल की जाती, तोड़फोड़ की जाती और कचहरी में पुलिस वालो को, मुवकिल आपस में लड़ना या फिर अपने विरोधियो को के साथ मारपीट की जाती वह शर्मनाक है.अपनी उचित मांग पर यदि हड़ताल पर जाते कोई आपति नहीं परन्तु यदि पहले से बता दिया जाये तो अच्छा है जिससे लोगो को तकलीफ न होवे परन्तु ऐसा नहीं होते.एक बार कानपूर में इतनी अराजकता फैलाई की कानपूर के कोर्ट की सारी कार्यवाही शहर से करीब १०० किलोमीटर दूर भेज दी गयी जिससे सबको बहुत तकलीफ हुई.लुच्नो में एक वकील का एक व्यापारी नेता सेसपति के मामले में मुक़दमा चल रहा था उस नेता को वकीलों ने कचहरी में मारा और उसके कपडे फाड दिए इस बात को लेकर व्यापारी हड़ताल पर चले गए परन्तु प्रदेश की पुलिस और सरकार इनसे इतनी डरती की इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करी जाती.इनके विरोधी यदि अदालत में पैरवी करने आते तो उनको मारा जाता और पुलिस या तो बचाती नहीं नहीं तो उनकी भी पिटाई की जाती है.इलाहाबाद में एक वकील की हत्या हो गयी उसपर वकीलो ने हरताल कर दी,हाई कोर्ट बंद करा दी और सड़क में पब्लिक की ४ कारो में आग लगा दी ११ मार्च २०१५ को अदालत परिसर में वकीलों और एक दरोगा की बीच कुछ कहा सूनी हुई जिसपर दरोगा ने अपने बचाओ में गोली चला दी जिससे एक वकील की मौत हो गयी और एक घयल हुआ वही वकीलों की गोली से एक पुलिस वाला बुरी तरह घयल हुआ. इससे गुस्से वकीलों ने शहर में तो तांडव किया ही पुरे प्रदेश में हडताल के समय वकीलों ने पुलिस ऑफिस और अधिकारिओ पर हमला किया दरोगा के समर्थन में पुलिस वाले आ गए हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच बैठा दी .इस तरह की घटने रोज़ होती जा रही कानपूर में यदि पुलिस ने ट्राफिक नियम तोड़ने या और किसी मामले में चलन काट दिया बस वकील भड़क जाते.अब तो निजी मामलो की लडाई सड़क में आ गयी.यहाँ तक वकील जजों से भी भिड जाते है और स्थानीय चुनावो में नियम तोड़ते कभी कभी आपस में भी लड़ जाते.इस तरह इस नोबल पेशे को बिकाऊ और सस्ता बना दिया.बहुत कम मामले में किसी वकील को दंड मिलता.पुलिस डरती और सरकार वोट बैंक के मामले के चलते चुप चाप तमाशा देखती रहती और वकीलों की दबंगई बढ़ती जा रही है.न्यायालयों को इन मामलो का संज्ञान लेते कुछ कार्यवाही करनी चाइये वैसे भी मुकदमो की लम्बी लाइन लगी है और इसके लिए कोई उपायाय सोचना चाइये. वकीलों को आराजकता, हिंसा और हड़ताल की इस तरह की छूट नहीं दी जा सती कानून की रक्षा करने वाले कानून से ऊपर नहीं हो सकते. ऐसी खबरे रोज़ देश के हर क्षेत्र से सुनने में आती है. जो बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण ये पवित्र पेशे को बदनाम करता है.इस मामले में नियम बन्ने चाइये जिसका पालन होना चाइये.
रमेश अग्रवाल ,कानपुर



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