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सच्चे कर्मयोगी डॉ कलाम को क्रेतयज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजली

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जय श्री राम

देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम सच्चे   मायने में भगवन कृष्णा के गीता में कहे अनुसार  कर्मयोगी थे जो जिन्दगी भर राष्ट्र और मानवता के लिए कार्य करते रहे.एक गरीब परिवार में जनम ले जिस तरह वे एक श्रेष्ठ वैज्ञानिक के रूप में पुरे विश्व में प्रसिद्ध हुए वह उनकी तीब्र इच्छशक्ति और साहस को दर्शाता है.वे सदा जीवन और उच्च बिचार के धनी थे और हमेश अपने कार्य में ही केन्द्रित रहते थे.वे आम आदमी के राष्ट्रपति थे और घमंड तो उनको छु भी नहीं सका,वे कहते थे की बीमार रह कर मरना बहुत बुरा होता है और उसी उद्देश्य को उन्होंने सफलता पूर्वक निर्वाह किया.जब उन्होंने शिलांग IIM में एक भाषण के समय ह्रदय घात से हम सबको  रोते हुए छोड़ कर चले गए.कलाम साहिब अब हमारे बीच नहीं है परन्तु वे भारतीयों के ह्रदय में बस गए.देश ने एक अमूल्य व्यक्ति खोया जिसकी पूर्ती करना मुस्किल होगा.ऐसे बहुत कम लोग होते है जो ऐसी यादगारे छोड़ जाते है.ऐसे लोग शताब्दी में २-४ ही होते है.उनकी मानवीय संवेदना का अंदाज़ इसी से लगता है की जब वे गुवाहटी से शिलोंग कार से जा रहे थे उनके आगे एक सुरक्षा वन जा रही थी जिसमे एक सिपाही हाथ में राइफल लिए खड़े हो कर चल रहा था,उन्होंने अपने सुरक्षा अधिकारी से कहा की वह थक जाएगा उसको बैठ जाने को कहो लेकिन ऐसा न हो सका.हॉल में पहुच कर उन्होंने उस सिपाही को बुला कर धन्यवाद् किया हाथ मिलाया और कहा की तुम हमारे लिए २ १/२ घंटे खड़े थक नहीं गए जिसपर उन्होंने जवाब दिया की हम सर आपके लिए ८ घंटे भी खड़े रह सकते.आतंकवाद से लड़ने के लिए उनकी सलाह थी की “न कभी भूलो और न कभी माफ़ करो “.वे संसद के अवरोध से आहात थे और विद्यार्थियो से इसके उपायाय के बारे में चर्चा करना चाहते थे.वे कहते थे के राज नेताओ को ३०% समय राजनीती में और ७०% विकास में देना चाइये

१९९८ उस वक़्त के प्रधान मंत्री माननीय अटलजी उनको मंत्री बनाना चाहते थे परन्तु उन्होंने कहा की इस वक़्त वे मिसाइल और परिमाणु में कार्य कर रहे इस लिए वे इस पद को स्वीकार नहीं करेंगे.असल में वे पायलट बनना चाहते थे परन्तु उसमे सफल न होने में वे वैज्ञानिक बन गए सबसे पहले उन्होंने डीआर डीओ में कार्य शुरू किया और एक हेलीकाप्टर की डिजाईन तैयार की परन्तु वह के वातावरण कार्य वाला न होने से वे बाद में विक्रम सारा भाई के साथ इसरो में काम किया जाह उन्होंने रोहणी उपग्रह और दुसरे बहुत से कार्यो में अभूतपूर्व योगदान किया और इसी लिए मिसाइल मन कहलाने लगे.वे केवल बच्चो और विद्यार्थियो के कार्यक्रम में जाते थे.वे शाकाहारी थे और गीता के साथ कुरान की श्लोक याद थे.संगीत में भी शौक था.२६ मई २००५ को ४ दिन की स्विट्ज़रलैंड के दौरे में गए और वहां के लोग उनकी योग्यता और ज्ञान से इतने प्रभावित हुए की उन्होंने २६ मई को हर साल साइंस दिवस के रूप में मानते है.विन्मम्र्ता की मिशल थे !उन्होंने ही १९९८ में पोखरण २ में भूमिक निभाई थी और एक  कप्तान की ड्रेस में काम करते थे पहचान छिपाने के लिए..अटलजी ने जब उन्हें राष्ट्रपति बनवाया तो कुछ लोगो को शंका थी को एक वैज्ञानिक कैसे इस पद को सफल हो सकता परन्तु उन्होंने जिस अच्छी तरह कर्त्तव्य  को निभाया उसने आलोचकों की बोली बंद कर दी.उनके हिस्साब से २ बार बहुत दवाब था जब रूस के दौरे पर उनको  बिहार विधान सभा भंग कर राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने में जब विवाद हुआ तो वे इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार थे लेकिन समझाने पर मान गए दुसरी बार लाभ के पद के लिए कैबिनेट प्रस्ताव पर दुबारा विचार के लिए वापस कर दिया था.इसी तरह सोनिया गाँधी के प्रधान मंत्री बन्ने पर उन्होंने ही विदेशी मूल के मुद्दे पर सलाह दी थी.गुजरात दंगे पर हुए विवाद को बखूभी संभाला.ये देश का दुर्भाग्य और अन्याय था की सोनिया गाँधी ने उन्हें दुबारा राष्ट्रपति के लिए नहीं चूना और प्रतिभा पाटिल को बनाया.वे इफ्तार दावत के विरुद्ध थे परन्तु उसके बदले गरीबो को खिला देते थे.१९९७ में उन्हें भारत रतन से सम्मानित किया गया. एक बार उनके भाई उनसे मिलने राष्ट्रपति भवन में आये और अजमेर जाना था.उन्हें कोई सरकारी गाडी नहीं दी गयी और कहा की किसी को पता न चले की ये मेरे भाई है,

१.भगवान उनकी मदद करते है जो मेहनत करते है. २.आकाश की तरफ देखो हम अकेले नहीं है पूरा आकाश मंडल हमारा दोस्त है और उनकी मदद करता जो सपने देखते और काम करते.

३.मुसीबते ,सफल होने के लिए ज़रूरी है.४.हम लोगो को अपना आज बलिदान (sacrifice) करना चाइये जिससे हमारे बच्चो का भविष्य अच्छा हो.५.बड़े सपने देखने वालो के सपने हमेश सफल होते हैं.६.हमको एक नेता को परिभाषित करना है उसके पास जुनून (धुन)और दूर दृष्टी होनी चाइये और किसी समस्या से नहीं डरना चाइये बल्कि डट कर मुकाबला करना चाइये.उसको ईमानदारी से अपने लक्ष्य को सफल होने के लिए खूब म्हणत से कार्य करना चाइये!७.मीरा युवको को सन्देश है की विभिन्न तरीको से सोचो, आविष्कार करने की भी हिम्मत होनी चाइये!नई नई खोजो को ढूडना चाइये.मुस्किल को हल करने की हिम्मत होनी चाइये और समस्या को हल करना चाइये!ये अच्छे गुण है और इस दिशा में कार्य करना चाइये! ८.देश को भ्रस्ताचार से मुक्त करने और विद्वानों को तैयार करने में माता,पिता और गुरु की बहुत बड़ी भूमिका होती है.`९.सपना सच होने के लिए सपना होना चाइये.

वे विनम्रता की अदभुत मिशल थे और नहीं चाहते थे की उनके निधन में छुट्टी हो लेकिन उनके प्यार के कारन ऐसा न हो सका.उनकी एक किताब  ADVANTAGE INDIA में २०२० तक देश को सुपरपावर बनाने के लिए सुझाव है जिसमे डिजिटल इंडिया,ग्रामीण विकास,स्वस्थ्य,नई उर्जा नीति,कौशल विकास के लिए विस्तार से चर्चा की गयी है.

ऐसे महँ राष्ट्रवादी के लिए कुछ कहने के लिए शब्द कम हो जाते है.वे हमेश याद किये जायेंगे और बहुत सी योजनाए उनके नाम पर रक्खी जायेगी.उनका विचार था की देश को ऊचाइयो पर ले जाये.उनके पदचिन्हों पर चलना ही सच्ची श्रधांजलि होगी.

रमेश अग्रवाल,कानपुर

१.



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