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गायत्री माता का महत्व

Posted On: 1 May, 2017 में

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जय श्री राम गायत्री मंत्र वैदिक धर्म का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है जिसके जपने से सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते और तन मन को सकरात्मक उर्जा प्राप्त होती है.!पुराणों के अनुसार ब्रह्माजी को आकाशवाणी द्वारा गायत्री मंत्र प्राप्त हुआ जिसकी साधना कर के उन्हीने श्रृष्टि निर्माण की शक्ति प्राप्त हुई.!गायत्री को वेदमाता कहते है चारी वेद इसकी व्यख्यामात्र है.!गंगा,गौ,गीता और गायत्री सनातन  सस्कृति के 4 आधार शिलाए है जिसमे गायत्री माता सर्वोपरि है.ब्रह्माजी ने विश्वामित्रजी को तपस्या से प्रसन्न हो कर ये मंत्र उन्हेदिया था.इसे ऋग वेद में पाया जाता है.!सभी धार्मिक कार्यो में इसे इस्तेमाल किया जाता है !ये मंत्र है

ॐ भूभुर्व स्व :तत्सवितुर्वरेणयं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योन:प्रचोदयात्! जिस अर्थ है !उस प्राण स्वरुप ,,दुःख नाशक सुखस्वरूप श्रेष्ठ तेजस्वी ,पापनाशक ,देवस्वरूप परमात्मा को हम अंतरात्मा में धारण करे!वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में पेरित करे !                                                                                       ॐ (ब्रह्म),भू :( प्राणस्वरूप)भुव:(दुखनाशक)स्व:(सुखस्वरूप )तत(उस) सवितु:(तेजस्वी),वरेण्यं (श्रेष्ठ )भर्गो(पापनाशक),देवस्य (दिव्य की) धीमहि (धारण करे),धियो(बुद्धि को),यो (जो),न:(हमारे)प्रचोदयात (पेरित करे)!अंग्रेज़ी में इसे लिखते है.:-om bhur bhuvah swah,tat savitur varenyam bhargo devasya,dhimahi dhiyo yo nab procodayat!

इसमें मंत्र में २३ देवो का समन्वय है.!1 tat (गणेशजी),2.sa(नरसिंह जी) 3.vi(विष्णुजी) 4.tu(शिवजी),5.va(कृष्णाजी)6.re(राधा जी)7.ni (लक्ष्मीजी) 8.yam(अग्नि)9.bha(इन्द्र) १०.rgo(सरस्वती माँ),11 de(दुर्गा माँ )१२.va(हनुमानजी)१३.sya(प्रथ्वी)१४.dhee(सूर्य)१५.ma(श्री रामजी)16.hi (सीता माँ) 17.dhi(चन्द्र देव)18.yo(यम)१९.ya(ब्रह्माजी)20.na(वरुण)२१.cho(हरग्रीव)22.da(हमसा) २३.yaat(तुलसी)

गायत्री माँ के मुख में अग्नि,माथे में ब्रह्माजी,हृदय में विष्णु जी और सिर में शिवजी रहते है !गायत्री रूप में बुद्धि,सावित्री रूप में सुरक्षा और सरस्वती रूप में विध्या प्रदान करती है इसलिए गायत्री माँ को सर्व देव संपन्न कहा जाता है.!इसे रोगों से छुटकारा,पाप से मुक्ति और इच्छाए पुरी होती है.! अमेरिका और बहुत से देशो में १५ मिनट सुबह रेडियो से इस मंत्र का प्रसारण होता है.विकसित देशो ने इसकी महिमा का पता लगा लिया और बहुत से देशो में इसे इस्तेमाल किया जाता है.!

आधुनिक युग में इसके प्रचार में गुरदेव पंडित श्री राम शर्माजी का बहुत योगदान है जिन्होंने हरिद्वार में पहले अखिल भारीतय गायत्री परिवार की स्थापना की जिसे बाद में अखिल विश्व गायत्री परिवार में बदल दिया गया.और अब ये बहुत से देशो में फ़ैल चूका है !गायत्री केन्द्रों में गायत्री मंत्र की दीक्षा दी जाती हवं होते और बहुत से सामाजिक अध्यार्मिक कार्य होते  बहुर साहित्य निकला जाता.!आज कल इसकी ज़िम्मेदारी डॉ.प्रणव पंड्या पर है जो गुरु जी के दामाद है और उनके साथ उनकी धर्मपत्नी माँ शैलबाला मिशन का कार्य देखती.हाल में डॉ पंड्या को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था लेकिन मिशन के कार्य की वजह से उन्होंने मन कर दिया.!अब मिशन पुरे विश्व में बहुत अच्छा कार्य कर रहा है !                                                                                                                                                      रमेश अग्रवाल -कानपुर downloadimages (7)images (8)



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